➤ तृतीय श्रेणी के पेंशनरों को 57 फीसदी एरियर जारी करने के आदेश, 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 की अवधि का भुगतान
➤ क्लास एक और क्लास दो का एरियर भी जारी करने की प्रक्रिया शुरू, 67 साल से अधिक उम्र वालों का एरियर पूरा देने का दावा
➤ हिमाचल में डॉक्टरों के 475 पद खाली, बिलासपुर में 133 में से 31 चिकित्सकों के पद रिक्त
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों के एरियर को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने तृतीय श्रेणी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को विधानसभा सदन में क्लास थ्री से सेवानिवृत्त पेंशनरों को 57 फीसदी पेंशन एरियर जारी करने के आदेश दिए।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तृतीय श्रेणी के पेंशनरों का 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक का पेंशन एरियर 57 फीसदी जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि क्लास एक और क्लास दो के पेंशनरों का एरियर भी देना शुरू कर दिया गया है।
पेंशनरों के लंबे समय से लंबित वित्तीय लाभों के बीच सरकार के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एरियर का भुगतान कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच लगातार उठते रहे वित्तीय मुद्दों में प्रमुख रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 67 साल से अधिक उम्र के पेंशनरों को सभी एरियर का भुगतान कर दिया गया है। यदि किसी का कोई छोटा-मोटा एरियर बाकी रह गया है तो उसे भी जारी करने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
उन्होंने यह भी कहा कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का एरियर पूरा दिया जा चुका है, जबकि क्लास फोर का पे एरियर भी दिया जा रहा है।
सरकार की ओर से एरियर भुगतान को अलग-अलग श्रेणियों में आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में मंगलवार को तृतीय श्रेणी से सेवानिवृत्त पेंशनरों के लिए 57 फीसदी भुगतान का आदेश सामने आने से लंबे समय से वित्तीय लाभ का इंतजार कर रहे पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है।
1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक का एरियर शामिल
मुख्यमंत्री के अनुसार तृतीय श्रेणी से सेवानिवृत्त पेंशनरों के लिए जारी किया गया 57 फीसदी एरियर 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक की अवधि से संबंधित है।
पेंशनरों के लिए एरियर केवल एक वित्तीय भुगतान नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित उनके सेवा लाभों से जुड़ा मुद्दा रहा है। विधानसभा के भीतर और बाहर पेंशनरों की ओर से समय-समय पर लंबित वित्तीय लाभ जारी करने की मांग उठती रही है।
सरकार ने अब श्रेणीवार भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। मुख्यमंत्री के अनुसार क्लास एक और क्लास दो के एरियर का भुगतान भी शुरू कर दिया गया है।
1493 सिलाई अध्यापिकाएं पंचायतों में कार्यरत, मानदेय में बढ़ोतरी
विधानसभा में मंगलवार को ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सिलाई अध्यापिकाओं से जुड़ा मामला भी सामने आया। शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के जवाब में पंचायती राज मंत्री ने बताया कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कुल 1493 सिलाई अध्यापिकाएं कार्यरत हैं।
इनमें से 1481 सिलाई अध्यापिकाएं दैनिक आधार पर कार्यरत हैं। इन्हें 508 रुपये प्रतिदिन की दर से मासिक पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
वहीं, 12 सिलाई अध्यापिकाएं अनुबंध आधार पर कार्यरत हैं। इन्हें 1 अप्रैल 2026 से 10,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी से स्पष्ट है कि पंचायत स्तर पर सिलाई प्रशिक्षण और इससे जुड़ी गतिविधियों में बड़ी संख्या में अध्यापिकाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं। इनके पारिश्रमिक और सेवा व्यवस्था का मामला भी विधानसभा में चर्चा का विषय बना।
हिमाचल के स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों के 475 पद खाली
विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी तस्वीर भी सामने आई। झंडूता के विधायक जीत राम कटवाल के अतारांकित प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के तहत चिकित्सकों के कुल 3020 पद स्वीकृत हैं।
इनमें से 2545 पद भरे हुए हैं, जबकि 475 पद रिक्त चल रहे हैं। रिक्त पदों में सामान्य यानी जनरल विंग के 293 पद और विशेषज्ञ चिकित्सकों के 182 पद शामिल हैं।
इस आंकड़े के सामने आने से प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की उपलब्धता का मुद्दा एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गया है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निर्भरता सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर अधिक होने के कारण चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सरकार ने कहा है कि चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरना निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यानी विभाग की ओर से आवश्यकता और उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार रिक्त पदों को भरने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
बिलासपुर में डॉक्टरों के 31 पद रिक्त
बिलासपुर जिले में भी चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। जिले में चिकित्सकों के कुल 133 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 102 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं, जबकि 31 पद रिक्त हैं।
सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल घवांडल में सात, मारकंड में चार, बड़थीन में तीन और सीएचसी झंडूता में चार चिकित्सकों के पद खाली हैं।
इन रिक्तियों का असर विशेष रूप से उन स्वास्थ्य संस्थानों की सेवाओं पर पड़ सकता है जहां सीमित संसाधनों के बीच मरीजों का इलाज होता है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि रिक्त पदों को भरना विभाग की लगातार जारी प्रक्रिया का हिस्सा है।
विधानसभा में एक ही दिन पेंशनरों के एरियर, पंचायतों में कार्यरत सिलाई अध्यापिकाओं के मानदेय और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों के रिक्त पदों से जुड़े मुद्दे सामने आए। इन फैसलों और आंकड़ों ने प्रदेश में कर्मचारियों के वित्तीय लाभ, ग्रामीण स्तर की सेवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने ला दिया है।



